EMI कैलकुलेटर: लोन लेने से पहले किस्त जान लें
लोन की रकम, ब्याज दर और अवधि डालिए — मासिक EMI, कुल ब्याज और हर साल का हिसाब तुरंत सामने आ जाएगा।
- होम, कार, पर्सनल — हर लोन के लिए
- साल-दर-साल भुगतान तालिका
- हम लोन नहीं बेचते, सिर्फ़ समझाते हैं
अपनी EMI खुद निकालें
स्लाइडर खिसकाएं या रकम टाइप करें। नीचे साल-दर-साल तालिका में देखें कि हर साल कितना मूलधन और कितना ब्याज जा रहा है।
लोन EMI कैलकुलेटर
घटती बकाया राशि (reducing balance) पर अनुमानित EMI। आपके लेंडर की शर्तें, फीस और दर में बदलाव अलग हो सकते हैं।
EMI कैसे बनती है — आसान भाषा में
बैंक EMI इस फ़ॉर्मूले से निकालते हैं:
EMI = P × r × (1 + r)n ÷ [(1 + r)n − 1]
- P = लोन की रकम (मूलधन)
- r = मासिक ब्याज दर, यानी सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
- n = कुल महीने, यानी साल × 12
हर महीने बैंक पहले बकाया रकम पर उस महीने का ब्याज लेता है, और EMI का बाकी हिस्सा मूलधन घटाता है। जैसे-जैसे बकाया घटता है, ब्याज का हिस्सा कम और मूलधन का हिस्सा ज़्यादा होता जाता है।
उदाहरण: ₹30 लाख, 20 साल, 7.5%
- r = 7.5 ÷ 12 ÷ 100 = 0.00625, n = 240 महीने
- मासिक EMI ≈ ₹24,168
- 20 साल में कुल भुगतान ≈ ₹58.00 लाख
- कुल ब्याज ≈ ₹28.00 लाख — लगभग उतना ही जितना लोन
- पहले साल की 12 किस्तों (₹2.90 लाख) में से लगभग ₹2.23 लाख सिर्फ़ ब्याज में जाता है
0.25% का फर्क भी मायने रखता है
RBI ने 7 Oct 2026 को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। ज़्यादातर नए होम लोन रेपो से जुड़े फ्लोटिंग रेट पर होते हैं, इसलिए आने वाले समय में बैंक दरें बढ़ा सकते हैं।
ऊपर के उदाहरण में दर 7.5% से 7.75% हो जाए तो EMI लगभग ₹24,168 से बढ़कर ₹24,628 हो जाती है — यानी हर महीने करीब ₹460 ज़्यादा। अक्सर बैंक EMI वही रखते हैं और अवधि बढ़ा देते हैं, जिससे कुल ब्याज और बढ़ जाता है। अपने बैंक का SMS या ईमेल ध्यान से पढ़ें।
अच्छा CIBIL स्कोर होने पर कई बैंक कम दर देते हैं — जानिए सिबिल स्कोर कैसे बढ़ाएं।
लोन जल्दी चुकाने का फायदा
उदाहरण: ऊपर वाले ₹30 लाख के लोन में तीसरे साल के अंत में ₹2 लाख एक साथ जमा करें और EMI वही रखें, तो लोन लगभग 27 महीने पहले खत्म हो सकता है और करीब ₹4.56 लाख ब्याज बच सकता है।
बोनस, खेती की फसल की आमदनी या किसी FD के पकने पर थोड़ा-थोड़ा प्रीपेमेंट करते रहना अच्छी आदत है। पर इमरजेंसी के लिए कुछ पैसा अलग ज़रूर रखें।
लोन लेने से पहले ये बातें जांचें
EMI बजट में फिट हो
सभी लोन की कुल EMI हाथ में आने वाली आय के लगभग 40% से कम रहे, तो घर खर्च और बचत दोनों चलते हैं।
KFS ज़रूर पढ़ें
Key Fact Statement में सालाना कुल लागत (APR), फीस और सभी चार्ज लिखे होते हैं। इसे मांगना आपका हक़ है।
फिक्स्ड या फ्लोटिंग समझें
फ्लोटिंग में दर घट-बढ़ सकती है पर प्रीपेमेंट मुफ़्त है; फिक्स्ड में किस्त तय पर प्रीपेमेंट पर चार्ज हो सकता है।
निवेश भी जारी रखें
EMI के साथ छोटी SIP भी चलती रहे तो लंबे समय में संतुलन बना रहता है — पढ़ें SIP क्या है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
EMI क्या होती है?
EMI (Equated Monthly Instalment) वह तय रकम है जो आप लोन चुकाने के लिए हर महीने देते हैं। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। शुरुआती सालों में ब्याज का हिस्सा ज़्यादा और बाद में मूलधन का हिस्सा ज़्यादा होता है।
₹30 लाख के होम लोन की EMI कितनी होगी?
20 साल और 7.5% सालाना ब्याज पर EMI लगभग ₹24,168 बनती है। ब्याज दर या अवधि बदलने पर EMI बदलेगी — ऊपर के कैलकुलेटर में अपनी स्थिति डालकर देखें।
रेपो रेट बढ़ने से मेरी EMI बढ़ेगी?
अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट और रेपो से जुड़ा है, तो बैंक दर बढ़ा सकता है। अक्सर बैंक EMI वही रखकर अवधि बढ़ा देते हैं। आप चाहें तो बैंक से EMI बढ़ाकर अवधि पहले जैसी रखने को कह सकते हैं।
क्या लोन जल्दी चुकाने पर चार्ज लगता है?
RBI के नियमों के अनुसार 1 जनवरी 2026 से व्यक्तियों को दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन (जो बिज़नेस के लिए न हों) पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र चार्ज नहीं लगता। फिक्स्ड रेट लोन पर लेंडर चार्ज ले सकता है — अपने लोन की KFS देखें।
प्रीपेमेंट करें तो EMI घटाएं या अवधि?
आमतौर पर EMI वही रखकर अवधि घटाने से कुल ब्याज ज़्यादा बचता है। अगर हर महीने का बजट तंग है तो EMI घटाना राहत दे सकता है।
कितनी EMI सुरक्षित मानी जाती है?
एक आम नियम यह है कि सभी लोन की कुल EMI आपकी हाथ में आने वाली मासिक आय के लगभग 40% से ज़्यादा न हो, ताकि घर खर्च, बीमा और बचत के लिए गुंजाइश रहे। लेंडर अपने नियमों से पात्रता तय करते हैं।
यह कैलकुलेटर कितना सटीक है?
यह घटती बकाया राशि (reducing balance) के मानक फ़ॉर्मूले पर चलता है। असली EMI में प्रोसेसिंग फीस, बीमा, दर में बदलाव या लेंडर के राउंड-ऑफ़ नियमों से थोड़ा फर्क हो सकता है।
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